रूस से आयात में 40.5% गिरावट, भारत की तेल खरीद में बड़ा बदलाव



भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार तनाव के बाद जारी ताजा व्यापार आंकड़े नई दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। 2 फरवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। इसके बाद भारत पर लगाया गया 25% रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा कि भारत रूसी तेल आयात में कमी कर रहा है, जबकि रूस की ओर से कहा जाता रहा कि भारत अपनी खरीद बंद नहीं करेगा। अब सामने आए ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारत ने वास्तव में रूस से आयात में उल्लेखनीय कटौती की है।

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी माह में रूस से भारत के कुल माल (मर्चेंडाइज) आयात में 40.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एक वर्ष पहले जहां भारत रूस से 4.81 अरब डॉलर का आयात करता था, वहीं अब यह घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में कमी है। रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत रही है, ऐसे में तेल आयात घटने का सीधा असर कुल व्यापार आंकड़ों पर पड़ा है।

समाचार एजेंसी Reuters ने उद्योग सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत की कुल तेल खरीद में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा 2022 के अंत के बाद सबसे कम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं जनवरी में मध्य-पूर्वी देशों से तेल आयात 2022 के बाद से सबसे अधिक रहा। इसके साथ ही सऊदी अरब एक बार फिर भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।

गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें तेल निर्यात पर पाबंदियां भी शामिल थीं। इसके बाद रूस ने भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल की पेशकश की, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने बड़े पैमाने पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया और रूस भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया था।

अब ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक राजनीतिक और व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button